
तेरा होना ही तो मेरी दुनिया बदल रहा है।
अंधेरों में घिरा दिल, अब खुद जल रहा है।
कदम जो डगमगाते थे तन्हाई- ए-सफर में,
तेरे साथ से ये रास्ता आसान हो रहा है।
न जाने कैसा जादू है तेरी इन आहटो में,
की पतझड़ का मौसम बहार में ढल रहा है।
जो कभी खामोश रहता था अश्कों की तरह,
वो जज्बा अब आंखों में बनकर गज़ल बन रहा है।
दुआओं में तुझे मांगा था उम्र भर के लिए,
वही अरमान अब इस सीने में पल रहा है।
मोहब्बत का असर कहू या तेरा नूर- ए – “आकाश”,
तेरा होना ही तो मेरी दुनिया बदल रहा है।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




