साहित्य

ऐप की खेप से दबा शिक्षक

डॉ.उदयराज मिश्र

सीख न मनिहैं जौ गुरुअन कै,दौर पढ़ाई में जो इतरइहैं।
पुअरा कइ आगि मती जरिके,पल माहिं में राखि के ढेर बनइहैं।।
कहत उदय मन बाढ़ब बाउर, घरहूँ कइ सांवा कोदो बिकइहैं।
जेतनी जल्दी फ़रिहैं पकिहैँ,वोतनै जल्दी झरि भीखि मंगइहैं।।

अति ढेरि किहेन हद लांघेन जब,तब रावन बालि मराय गयेन।
लख पूत नसायन बानर सँग,बल सगरो कतहुँ नसाय गयेन।।
बलि बाँधि गयेन बहु दान दिहे,दुर्योधन नाश कराय गयेन।
कहत उदय हद की हद है,हद लांघेन जे ते हेराय गयेन।।

जब अंक बदे डीएम एसपी घुमि घुमि लड़केन के टिप्स बतइहैं।
जेकरा समझाइ के टीचर हारेन वोकरा के अफसर समझैहैं।।
नित शाम सुबह शिक्षक पागल डेटा सबमिट कैसे होय पैहैं।
सच बाति यहई जौ ऐप हटे शिक्षक सबसे सुंदर समझैहैं।।

– डॉ.उदयराज मिश्र
नेशनल अवार्डी शिक्षक
9453433900

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