साहित्य
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प्रकृति और संतुलन
प्रकृति की गोद में जीवन का मधुर विस्तार, हर पत्ता, हर कण बोले संतुलन का सार। नदियाँ बहती शांत, सागर…
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मजदूर दिवस
एक मई के दिन सभी, दें मजदूरों मान । उनके कारण की बढ़े, सदा देश की शान ।। भूख -प्यास…
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पुस्तक समीक्षा : ‘रसबिंदु काव्य निकुंज’
भूमिका हिंदी साहित्य में काव्य परंपरा सदैव से भाव, विचार और संवेदना की त्रिवेणी रही है। इसी परंपरा को समृद्ध…
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भूलता नहीं
कभी हम मिले थे यह भूलता नहीं, प्यार जो पाये थे वह भूलता नहीं। अनजान अजनबी से हम थे मिले,…
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दोहों में मजदूर दिवस
‘ कामगार दिन ‘ होय है ,एक मई यह पर्व। ऑफिस – फैक्ट्री में इन्हें ,मिलती छुट्टी सर्व अनपढ़…
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गौतम बुद्ध का ज्ञान
गौतम बुद्ध का ज्ञान जय जय गौतम बुद्ध भगवान। जन्मे पांच सौ तिरेसठ ईस्वी पूर्व लुम्बिनी कपिलवस्तु स्थान। उन्तीस वर्ष…
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मजदूर हूं मैं
जिंदगी लेती है रोज नई परीक्षा, सुबह हो या शाम रहती है चिंता। आज कोई काम मिल जाए मुझे, तो…
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मैं मजदूर हूं
मैं मजदूर हूं क्या मैं मजबूर हूं ? सुबह-सुबह खुश होकर निकलता, काम आज भी मिल जाएगा प्रभु से हर…
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ग़ज़ल: “अंगार सी ज़िंदगी”
आसमान और डगरियाँ, धूप भी अंगार सी, बचपन से जवानी तोड़ती, हर चोट लाचार सी। क्यूँ पूछे “थकते हो तुम…
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ग़ज़ल
क्या खोना क्या पाना है यह मजदूरी का दाना है । पेट भरो फिर काम चलो इतना ताना- बना है…
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