आलेख
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मजदूर दिवस
19वीं सदी की औद्योगिक क्रांति के बाद स्थापित फैक्ट्रियों , कारखानों में अधिक उत्पादन एवं अधिक मुनाफा के दृष्टिगत मजदूरों…
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संभल जाऐं, बच्चों के भाषा विकास में मोबाइल न बन जाऐ बाधक
डॉ मनोज कुमार तिवारी वरिष्ठ परामर्शदाता एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी। 2007 में स्मार्टफोन आया व लोगों के रोजमर्रा…
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सभ्यता के वास्तविक शिल्पकार और श्रम की अंतहीन गाथा
मजदूर दिवस केवल एक तिथि विशेष का उत्सव या कैलेंडर का कोई लाल पन्ना मात्र नहीं है, बल्कि यह उस…
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मजदूर (श्रमिक)
मजदूर (श्रमिक) समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो शारीरिक श्रम के माध्यम से उत्पादन और निर्माण में योगदान देते…
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बुद्धत्व का सार: शून्यता से पूर्णता तक़
बोध का उदय: बुद्ध का जन्म केवल देह का आगमन नहीं, बल्कि उस विवेक का प्रकटीकरण है जो बाहरी संघर्षों…
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बुद्ध के जीवन-दर्शन
बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष स्थान है। यह केवल एक धार्मिक…
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मजदूरों के हितों की रक्षा जरुरी है
जब इस धरती का निर्माण हुआ तो इसमें पहले मजदूर के रुप में त्रिदेवों –ब्रम्हा, विष्णु एवं महेश ने काम…
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एक कोना अधूरा सा
जोडने की कड़ी में टूटती रहीं यह कहानी कोई जमाने पुरानी नहीं बल्कि मध्यम वर्ग के चक्की में पीसती हूई…
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आप आज जो बीज बोएंगे, बुढ़ापे में वही फसल आपको काटनी होगी
आज का युग दिखावे, तकनीक और स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की अंधी दौड़ का युग है। इस दौड़ में…
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भारत में पंचायती राज: वेदों का लोकतंत्र की जमीनी हकीकत
“जब तक सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं होता, तब तक सच्चा लोकतंत्र एक कल्पना मात्र है।” महात्मा गांधी के इन शब्दों…
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