साहित्य

इस बेबसी में रूठ के

कनक

इस बेबसी में रूठ के जाने से क्या मिला
अब सुलगते हैं ज़ख़्म जलाने से क्या मिला।।//१//

रुसवा न कर किसी को भी बेखुदी में यहां
अब तो किसी के घर को जलाने से क्या मिला।।//२//

बे दर्द हैं जमाना न घमंड में जी बहुत
जीना है गर तुम्हे तो खजाने से क्या मिला।।//३//

तन्हा सही है आज तू अफसोच मत ही कर
ख़ुद को दिया बना के जलाने से क्या मिला।।//४//

मत कर फ़िक्र किसी का अगर मगर में डगर
खाकर सुखी रोटियां दिखाने से क्या मिला।।//५//

कनक

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