धर्म/आध्यात्म

क्या सभी ज्योतिर्लिंग स्वतंत्र भारत में ही हैं …??

ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्र

प्रस्तावना –

वर्तमान समय में सामाजिक माध्यमों पर यह प्रश्न बार बार उठाया जा रहा है कि यदि सनातन धर्म अत्यंत प्राचीन है, तो फिर उसके प्रमुख तीर्थ ज्योतिर्लिंग केवल आज के स्वतंत्र भारत की सीमाओं में ही क्यों स्थित हैं। कुछ लोग यह भी कहने लगे हैं कि 1947 के पूर्व भारत में एक भी ज्योतिर्लिंग नहीं था। यह कथन सुनने में भले ही तर्कपूर्ण प्रतीत हो, किंतु वास्तव में यह ऐतिहासिक, शास्त्रीय तथा भौगोलिक दृष्टि से एक गहरी भ्रांति पर आधारित है। इस लेख का उद्देश्य इसी भ्रम का शास्त्रसम्मत और विवेकपूर्ण निराकरण करना है।

भारत और भारतवर्ष का मौलिक अंतर –
सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि आज का भारत एक आधुनिक राजनीतिक राष्ट्र है, जिसकी सीमायें 15 अगस्त 1947 के बाद निर्धारित हुईं। इसके विपरीत शास्त्रों में वर्णित भारतवर्ष कोई राजनीतिक इकाई नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूगोल है। पुराणों में भारतवर्ष की सीमा हिमालय से लेकर समुद्र तक मानी गई है। इसका अर्थ यह है कि प्राचीन काल में भारतवर्ष के अंतर्गत वर्तमान भारत के अतिरिक्त नेपाल, तिब्बत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और समीपवर्ती क्षेत्र भी सम्मिलित थे। अतः जब शास्त्र भारतवर्ष की बात करते हैं, तब वे किसी आधुनिक मानचित्र की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना से युक्त भूभाग की चर्चा करते हैं।
ज्योतिर्लिंग की अवधारणा क्या है –

ज्योतिर्लिंग कोई सामान्य मंदिर या मानव निर्मित धार्मिक संरचना नहीं है। यह शिवतत्त्व की वह दिव्य अभिव्यक्ति है, जहाँ भगवान शिव स्वयं अनादि और अनंत प्रकाश के रूप में प्रकट हुए माने जाते हैं। शिवपुराण, लिंगपुराण तथा स्कन्दपुराण में बारह ज्योतिर्लिंगों का वर्णन प्राप्त होता है। ये ज्योतिर्लिंग किसी राजा, शासन या काल विशेष द्वारा स्थापित नहीं किए गए, बल्कि वे अनुभूति, तप, साधना और परंपरा से पहचाने गए पवित्र स्थल हैं। इसलिये इन्हें किसी राजनीतिक व्यवस्था या कालखंड से जोड़ना शास्त्रीय दृष्टि से अनुचित है। क्या प्राचीन काल में अन्य क्षेत्रों में शिव उपासना नहीं थी, यह मान लेना कि शिव उपासना केवल वर्तमान भारत तक सीमित रही, ऐतिहासिक दृष्टि से गलत है। सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों पर पशुपति स्वरूप में शिव की उपासना के प्रमाण मिलते हैं। गांधार, बल्ख, बैक्ट्रिया और मध्य एशिया के अनेक क्षेत्रों में शिव और रुद्र उपासना के संकेत इतिहासकारों द्वारा स्वीकार किए गये हैं।

किन्तु कालांतर में विदेशी आक्रमणों, सांस्कृतिक विध्वंस, धार्मिक असहिष्णुता और जनसंख्या परिवर्तन के कारण उन क्षेत्रों में सनातन परंपरायें नष्ट होती चली गईं। मंदिर टूटे, परंपराएँ टूटीं और स्मृति लुप्त होती गई। जहाँ परंपरा समाप्त हो जाती है, वहाँ तीर्थ भी केवल इतिहास बनकर रह जाते हैं।

वर्तमान भारत में ही ज्योतिर्लिंग क्यों सुरक्षित रहे –
इस प्रश्न का उत्तर अत्यंत सरल और तथ्यपरक है। वर्तमान भारत वह भूमि रही है, जहाँ सनातन संस्कृति की निरंतरता बनी रही। यहाँ आक्रमणों और संकटों के बावजूद आस्था की धारा पूर्णतः समाप्त नहीं हुई। समाज ने किसी न किसी रूप में अपने तीर्थों, परंपराओं और उपासनाओं को जीवित रखा। जहाँ परंपरा जीवित रहती है, वहीं तीर्थ जीवित रहता है। इसी कारण आज सभी मान्य ज्योतिर्लिंग भारत की भौगोलिक सीमा में स्थित दिखाई देते हैं। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण का परिणाम है। 1947 को आधार बनाकर उठाया गया प्रश्न क्यों भ्रामक है। उन्नीस सौ सैंतालीस केवल एक प्रशासनिक और राजनीतिक विभाजन की तिथि है। धर्म, दर्शन और संस्कृति का जन्म किसी संवैधानिक तिथि से नहीं होता। काशी, केदार, उज्जैन या सोमनाथ भारत गणराज्य के निर्माण से हजारों वर्ष पूर्व भी उतने ही पवित्र थे जितने आज हैं।

जिस प्रकार मक्का सऊदी अरब बनने से पहले भी पवित्र था, यरूशलम इज़राइल बनने से पहले भी आस्था का केंद्र था, उसी प्रकार ज्योतिर्लिंग आधुनिक भारत से बहुत पहले अस्तित्व में थे।

उपसंहार –

यह कहना कि 1947 से पहले भारत में कोई ज्योतिर्लिंग नहीं था, ऐतिहासिक, शास्त्रीय और बौद्धिक तीनों दृष्टियों से असत्य है। ज्योतिर्लिंग किसी राष्ट्र की देन नहीं, बल्कि सनातन चेतना की अभिव्यक्ति हैं। वे भारतवर्ष की आत्मा के प्रतीक हैं, जिनकी जड़ें कालातीत हैं।

आज उनका भारत की सीमा में होना इस तथ्य का प्रमाण है कि यही भूमि सनातन परंपरा की सबसे सशक्त वाहक बनी रही। भारत केवल एक राजनीतिक इकाई नहीं, बल्कि तप, साधना, दर्शन और दिव्यता की जीवंत भूमि है। ज्योतिर्लिंग उसी शाश्वत परंपरा के प्रकाशस्तंभ हैं, जो काल, सत्ता और सीमाओं से परे हैं।
क्रमशः

(आचार्य अरुण दैवज्ञ जी महाराज; सनातन धर्म एवं संस्कृति प्रेरक-वक्ता)

राष्ट्रीय अध्यक्ष: माँ शारदा वेलफेयर सोसाइटी

सम्पर्क सूत्र: +91-9450276488

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