साहित्य

पंडित मदन मोहन मालवीय – काव्यात्मक श्रद्धांजलि

मनीषी सिन्हा

नमन उस युगपुरुष को जो
महामना बनकर अमर हुआ
मदन मोहन मालवीय- नाम
अमिट एक हस्ताक्षर हुआ !

भारत माँ के तेजस्वी सपूत
विद्या जिनकी साधना थी
वाणी में थी वेदों की गूंज
और कर्म में राष्ट्र आराधना थी !

न राजनीति का लोभ था
न सत्ता का कोई अभिमान
सेवा, समन्वय, सौहार्द में
व्यक्तित्व की थी पहचान !

प्रयाग की पावन धरा से उठकर
काशी को ज्ञान का केंद्र किया
शिक्षा केवल पठन पाठन नहीं
चरित्र संस्कार का महत्व बताया !

आज भी देश शीश झुकाता है
उस महा मानव के चरणों में
जिन्होंने सत्यमेव जयते जैसा
आदर्श वाक्य दिया भारत को !

– मनीषी सिन्हा
– गाजियाबाद, उ ॰ प्र ॰

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