साहित्य

पिता का अंतिम समय पुत्र से वार्तालाप संवाद

दिनेश पाल सिंह*,*दिलकश

तेरी बहन की शादी मेरे जीते जी हो जाए,
यह हम सबके लिए बहुत अच्छा होगा।
पिता का अंतिम समय पुत्र से
वार्तालाप संवाद

( पिता के मन के भाव पुत्र से)

तेरी बहन की खुशी में ही मेरा जीवन संवर जाए,
उसकी डोली उठे तो ये दिल दुआओं से भर जाए।
मेरे जीते-जी यदि उसका सुहाग का सपना पूरा हो,
समझो जीवन का हर पल, हर क्षण निखर जाए।

उसके आँगन में हँसी के दीपक उजले पल जलाएँ,
फूलों जैसी कोमल खुशियाँ उसकी बाँहों में समाएँ।
बस इतनी अर्ज़ है रब,उसकी हर मनोकामना पूरी हो,
और मेरे रहते-रहते उसकी दुनिया में नए रंग मुस्काए।

(पुत्र का भावपूर्ण उत्तर)

आपकी दुआओँ में जो अपनापन है, वही मेरा पथ-प्रकाश है,
मेरी हर साँस में बस आपका सम्मान, आपका ही विश्वास है।
बहन की खुशियों के लिए मेरा तन-मन हमेशा तैयार खड़ा है,
उसकी हँसी ही मेरे जीवन का सच्चा उत्सव, मेरा उजास है।

आपका कहना ही मेरे लिए वरदान, पिता-सम आशीष जैसा,
आपने जो भाव कहा, वह मेरे दिल में दीपक बनकर वैसा।
मेरे लिए बहन का सुहाग, उसका बसेरा, उसका भविष्य,
सबसे पवित्र धरोहर है, आपका शब्द सोने पर सुहागा जैसा।

*दिनेश पाल सिंह*,*दिलकश*

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