संस्कृत और सनातन संस्कृति भारत की आत्मा है- कल्पकथा परिवार
डॉ वेद प्रकाश भट्ट सत्यकाम कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह जी बताया कि साहित्यिक साक्षात्कार कार्यक्रम कल्प भेंटवार्ता श्रृंखला के विशेष अंक में पिथौरागढ़ उत्तराखंड से जुड़े डॉ वेद प्रकाश भट्ट सत्यकाम को भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित किया गया।
डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे के संयोजन के प्रेरक संवाद कार्यक्रम में प्रश्नों के उत्तर देते हुए प्रबुद्ध साहित्यकार एवं संस्कृतविद डॉ सत्यकाम ने देव भाषा संस्कृत की उपेक्षा पर पीड़ा के साथ कहा कि संस्कृत भाषा को दैनिक जीवन में उपयोग करने के ईमानदार प्रयास होने चाहिए।
कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के कार्यक्रम में डॉ भट्ट को सम्मानित करते हुए कल्पकथा संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने कहा कि संस्कृत और सनातन संस्कृति भारत की आत्मा है संस्कृत चेतना का आधार है तो सनातन संस्कृति राष्ट्र की एकता का स्तंभ है।
चार चरणों क्रमशः व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न, और चटपटे प्रश्न अटपटे उत्तर, के विशिष्ठ आयोजन के अंत में सूरदास सीही फरीदाबाद हरियाणा से जुड़ी डॉ श्रीमती जया शर्मा प्रियंवदा के स्वर में वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत का गायन किया गया। तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।




