साहित्य

सफलता का द्वार

शशि कांत श्रीवास्तव

सफलता का यह द्वार
दूर बहुत दूर..है अभी,
है सुनहरा सा -पर
रास्ते इसके पथरीले से और
उबड़ खाबड़ टेढ़े मेढ़े से हैं..,
क्योंकि……,
दूर बहुत दूर..है मंजिल अभी |
सफलता का यह द्वार,
हर बार पास बुलाता है हमें,
और हमारे कदम चल पड़े हैं,
उस राह पर….,
जो कि दुर्गम और चुनौती पूर्ण हैं |
सत्य, समय, आशा और धैर्य,
सफलता के इन मंत्रों को लेकर,
चल पड़े हैं अपने लक्ष्य की ओर,
क्योंकि…….,
दूर बहुत दूर..है मंजिल अभी |

*शशि कांत श्रीवास्तव*
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब

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