
यह बात ग्राम गुराडीया वर्मा तहसील जावर में चल रही रामकथा में रामकुटी आश्रम से पधारे संत श्री उद्धवदास जी ने कथा के पंचम दिवस में कही यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे संस्कारवान बने तो पहले हमें स्वयं संस्कारवान बनना पड़ेगा। यदि हम स्वयं सिगरेट मंगवा कर पियेंगे तो बच्चे सिगरेट पीना जरूर सीखेंगे। यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे चरित्रवान बने तो पहले हमें चरित्रवान बनना पड़ेगा। मनुष्य पर्वत से गिरता है तो एक बार मरता है लेकिन यदि चरित्र के शिखर से गिर जाए तो उसके कई जन्म बर्बाद हो जाते हैं। अपने सत्संग में उन्होंने बताया की मर्यादा पुरुषोत्तम राम प्रातः काल उठ कर अपने माता-पिता और गुरु के चरणों में शीश झुकाते थे। शास्त्रों में माता-पिता और गुरु को देवता कहा गया है इसलिए हमें भी अपने माता-पिता और गुरु के चरणों में शीश झुकाना चाहिए एवं उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिये। गुरु के सामने किसी दूसरे व्यक्ति से स्वयं का सम्मान भी नहीं करवाना चाहिए। उन्होंने सत्संग में कहा की ज्ञान ओर वेराग्य भक्ती के पुत्र है। यदी हम भगवानकी भक्ति करना चाहते हैं तो हमें ज्ञान प्राप्त कर मन में वेराग्य जाग्रत करना पड़ेगा। रामकथा के पंचम दिवस में आज मर्यादापुरुषोत्तम राम एवं देवी भगवती माता जानकी का विवाहोत्सव भी मनाया गया जिसमें सभी भक्त भावविभौर होकर झूम उठे।
परमानन्द राठौर गुराडीया
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