हरियाणा

उन्मुक्त उड़ान मंच की काव्य प्रतियोगिता में डॉ फूलचंद्र विश्वकर्मा और विशेष शर्मा विजयी घोषित

हरियाणा राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवम्बर 2025 को उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा अपने रचनाकारों के मध्य एक विशेष काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज कराई। प्रतियोगिता के प्रथम चरण में कुल 18 रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट काव्य-प्रस्तुतियाँ दीं। इनमें अशोक दोशी “दिवाकर”, माधुरी शुक्ला “स्वरा”, संगीता चमोली “इंदुजा”, विशेष शर्मा “सुहासिनी”, फूलचंद्र विश्वकर्मा “भास्कर”, अरुण ठाकर “कवित्त”, डॉ. पूनम सिंह “सारंगी”, संजीव भटनागर “सजग”, सुनीता ममगाई, डॉ. आदेश कुमार पंकज, शिखा खुराना “कुमुदिनी”, आशा बुटोला “सुप्रसन्ना”, रेखा पुरोहित “तरंगिणी”, रंजीता श्रीवास्तव, शालिनी श्रीवास्तव, रंजना बिनानी “स्वरागिनी”, दिव्या भट्ट “स्वयं” तथा नीतू रवि गर्ग “कमलिनी” सम्मिलित रहीं। निर्णायक समिति द्वारा मूल्यांकन उपरांत द्वितीय चरण हेतु 10 प्रतिभागियों, तृतीय चरण हेतु 8, चतुर्थ चरण हेतु 7 तथा पंचम एवं अंतिम चरण हेतु 6 प्रतिभागियों का चयन किया गया। प्रतियोगिता में विषय-वस्तु, वेशभूषा, सम्बोधन, उच्चारण, प्रस्तुतीकरण, आत्मविश्वास, भाव-भंगिमा, लयात्मकता, समापन तथा समय-सीमा—इन दस मानकों के आधार पर प्रत्येक चरण में प्रतिभागियों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। प्रतियोगिता का निष्पक्ष एवं गरिमामयी मूल्यांकन माननीय निर्णायक समिति-डॉ. स्वर्णलता सोन “कोकिला”, सुरेश चंद्र जोशी “सहयोगी”, नीरजा शर्मा “अवनि” तथा डॉ. अनीता राजपाल “वसुंधरा”—द्वारा किया गया। उनकी उत्तरदायी एवं समर्पित निर्णायक भूमिका के लिए मंच द्वारा उन्हें “उन्मुक्त निर्णायक गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। प्रत्येक चरण के चयनित प्रतिभागियों को क्रमशः काव्य सुमन, काव्य मंजरी अंबुज, काव्य प्रसून तथा काव्य सरोज सम्मानों से अलंकृत किया गया। अंतिम चरण के परिणामस्वरूप उन्मुक्त उड़ान मंच के प्रथम वार्षिकोत्सव पर डॉ. फूलचंद्र विश्वकर्मा “भास्कर” को काव्य सम्राट तथा विशेष शर्मा “सुहासिनी” को काव्य सम्राज्ञी घोषित किया गया।
मंच की संस्थापिका, अध्यक्षा एवं संयोजिका डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” ने प्रतियोगिता की सफलता हेतु समर्पित प्रतिभागियों एवं सम्माननीय निर्णायक समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा- “मंच, साहित्य एवं सृजन-साधना के प्रति आपकी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पित भावना सराहनीय है। प्रभु से प्रार्थना है कि आपकी साहित्यिक साधना एवं निःस्वार्थ सेवा निरंतर अविरल प्रवाहित होती रहे।”

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