साहित्य

आज में रहना सीखें

डॉ.पुष्पा सिंह

जीवन हे मन आज में जिओ
करो नहीं तुम कल की फिक्र,
आज का सपना पूरा कर लो
भूले करो ना कल का जिक्र।

चुनचुन कर अच्छाई सारी
भर वो अपनी झोली में
बहा पनारे सभी बुराई
दहन करो कुछ होली में।

बीता कल कल था अपना
सीख सिखा कर चला गया,
आज सभी का सदा सुनहरा
खुशी ने उर उपवन महकाया।

आज सभी का सदा जीवन्त
आज में सत्य की सुन्दरता,
भूत भविष्य दिल में बसता
शिद्दत जीवन है बुद्धिमत्ता।

सदा आज में जीएँ सारे
रखिए आज की प्राथमिकता।
डॉ.पुष्पा सिंह

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