
आओ बच्चों करें वंदना,रघुनंदन प्रभुवर श्री राम की।
वंदनीय श्रीराम की सेवा,आठों पहर प्रातः शाम की।।
सिर पर हाथ रखें राम जी,तो जीवन बेड़ा पार हुआ।
कृपा राम-जानकी बरसाएँ,मानव जन्म उद्धार हुआ।।
पिताश्री का वचन निभाने,हर्ष में राम वनवास हुआ।
पीछे उनके चलीं सियाजी,मन में बड़ उल्लास हुआ।।
साहस भरे वीर बढ़ते रहते,चिंता नहीं परिणाम की।
वंदनीय श्रीराम की सेवा,आठों पहर प्रातः शाम की।।
लक्ष्य प्राप्त उसको होता है,करता है जो पूर्वाभ्यास।
वृद्ध जनों के जीवन से सीखें,राम ही अंतः है आस।।
लखन-भरत-सा मिलें न भ्राता,सारे जग में विश्वास।
बजरंगबली का दिल देखो,राम बसे उसमें हर श्वास।।
शुभ कार्य करें जीवन में,सोचते कभी नहीं दाम की।
वंदनीय श्रीराम की सेवा,आठों पहर प्रातः शाम की।।
सीताहरण किया रावण ने,दु:खी थे साधू संत सभी।
रावण का वध करें श्रीरामजी,कहें ऋषि महंत सभी।।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हैं,कहते महावीर हनुमान।
इंद्रदेव व रावण दोनों,रखें श्रीराम-सा अनुपम ज्ञान।।
कण-कण में शिवप्रिय बैठे,जप लो मनका राम की।
वंदनीय श्रीराम की सेवा,आठों पहर प्रातः शाम की।।
रावण वध कर लौटे श्रीराम,अयोध्या में खुशी छाई।
उनके स्वागत में दीवाली,राम लखन सिया हैं आई।।
राक्षसों को मार कर,विभीषण को लंकापति बनाए।
सिया राम लक्ष्मण संग,भक्त हनुमत अयोध्या आए।।
रोम-रोम तो श्रीराम बसे,जय पवन पुत्र हनुमान की।
वंदनीय श्रीराम की सेवा,आठों पहर प्रातः शाम की।।
ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी. कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.




