साहित्य

भारतवर्ष

दुर्गेश मोहन

भारतवर्ष है न्यारा,
यह प्राणों से है प्यारा।
सारे जहां से अच्छा,
भारत है हमारा।
भारत के उत्तर में,
हिमालय है रक्षक।
दुश्मनों से बचाती ,
कभी नहीं बनती भक्षक।
दक्षिण में हिंद महासागर,
हमें बनाती है सामर्थ्यवान।
इनके कल _कल जल,
हमें बढ़ाती है शोभायमान।
राम,कृष्ण की है धरती,
इसका नहीं है सानी।
हमारा भारत है महान ,
इसे नहीं होती है परेशानी ।
गांधी ,नेहरू ,टैगोर की थी ,
अद्भुत छवि ।
ये सब थे ,
प्रसिद्ध लेखक या कवि।
इन लोगों ने दुनिया में ,
भारत का बढ़ाया मान ।
अपने अनुपम कार्यों से,
भारत देश को बनाया महान।
मां सीता है पूजनीया,
ये हैं देवी अवतार ।
इनकी है अद्भुत महिमा,
इनसे निर्मित हुआ संसार।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।
प्यार का अनुपम संदेश अपनाओ।
बेटी का भ्रूण हत्या है पाप,
यह है जघन्य अपराध।
यह समाज को कलुषित कर,
बना निरर्थक अभिशाप।
बेटी…
प्यार…
बेटी पढ़कर करती है,
समाज का कल्याण।
यह दो वंशों को जोड़कर,
बनाती है अपनी पहचान।
बेटी…
प्यार…
बेटी समाज की सेवा कर,
उसे बनाती है महान।
यह अरमानों को पूरी कर,
राष्ट्र के लिए बनी है वरदान।
बेटी…
प्यार…
यह बच्चों में संस्कार देती,
बच्चे बन जाते नेक इंसान।
वे अपनी मां के कर्जों को चुकाकर,
बनना चाहती है सामर्थ्यवान।
बेटी…
प्यार…
बेटी बहन रूप है,
भाई का प्यारा।
बेटी मां का रूप है,
बेटी के लिए जग सारा।
बेटी…
प्यार…
बेटी दुर्गा, काली हो
या हो सरस्वती।
सभी रूप पूजनीया हैं,
हमसब उतारें उनकी आरती।
बेटी…
प्यार…
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)

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