साहित्य

बस धीरज का छोर न छूटे

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

 

मुखड़ा
आँधी आए, तूफ़ाँ टूटे,
राह भले ही कठिन बहुत हो।
टूटे सपने, छूटें अपने,
बस धीरज का छोर न छूटे।

दुख की घटा जब घिर-घिर आए,
आँखों में जब नीर उमड़ जाए।
हिम्मत की लौ जलाए रखना,
विश्वास का दीप न टूटे।
आँधी आए, तूफ़ाँ टूटे…
बस धीरज का छोर न छूटे।

काँटे बिछे हों पग-पग पर,
छाया न मिले थकी राहों पर।
सत्य-साहस संग चलते रहना,
मन का संबल कभी न रूठे।
आँधी आए, तूफ़ाँ टूटे…
बस धीरज का छोर न छूटे।

सांझ ढले तो भोर भी आए,
हार के बाद ही जीत मुस्काए।
संघर्षों से राह बनती है,
आशा का आकाश न छूटे।
आँधी आए, तूफ़ाँ टूटे…
बस धीरज का छोर न छूटे।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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