
पिज्जा छोड़ो बर्गर छोड़ो,छोड़ो सभी नूडल्स मैगी।
मैदे से बनता है ये सब,इससे होती ये बॉडी फैटी।।
मन न माने खाओ बच्चों,यदा कदा ही फास्ट फूड।
इसको त्यागो प्यारे बच्चों,यही तो मारती है भूख।।
दूध दही घी मक्खन खाओ,गोरस एवं छाछ पिओ।
हर ऋतु में ताजे फल खाओ,फलों के जूस पिओ।।
हलुआ पूड़ी पनीर मलाई,और सूखे मेवे सेंवई खीर।
ताजी हरी सब्जियाँ खाओ,पिओ मत आरओ नीर।।
काली कोल्डड्रिंक पिओ नहीं,शर्बत पिओ शिकंजी।
खूब सलाद खाना बच्चों,इससे बनेगी ये तंदुरस्ती।।
सुबह उठना फ्रेश होना,नहाना पढ़ना नाश्ता करना।
तैयार होकर स्कूल जाना,कुछ खेलकूद भी करना।।
कक्षा में मन लगा के पढ़ना,स्कूल में एक्टिव रहना।
घर के काम में हाथ बटाना,जीवन में खुशी रहना।।
दाल रोटी सब्जी चावल खाना,तब ताकत आयेगी।
बच्चों खाओगे सबकुछ,तो फर्स्ट आएगा/आयेगी।।
टॉफी चॉकलेट जेम च्विंगम,से खराब होते हैं दांत।
फ़ास्ट फ़ूड ज्यादा खाने से,हो जाती खराब आँत।।
चाउमीन मेमोज़ समोसे ब्रेड,पाचन खराब होता है।
इसे ज्यादा खाने वालों का,स्वास्थ खराब होता है।।
कब्ज बनी रहती हरदम,और पेट साफ न होता है।
सिरदर्द हो चक्कर आता,मोशन साफ न होता है।।
हर बीमारी की यह जड़ है,खानपान तेल मसाला।
तली भुनी चीजें ये खाना,चाट चटपटे का पाला।।
अन्न दाल हरा साग फल,दूध दही घृत पनीर मट्ठा।
थोड़ा गुड़ खाएं ये,सलाद स्वास्थ्य हेतु है अच्छा।।
सौ बीमारी की एक दवा,खान पान का यह ज्ञान।
बड़े बुजुर्ग बताएं जो,जीवन में हो उसका ध्यान।।
स्वास्थ्य ठीक रहे तो ही,जीवन की चलती है रेल।
कभी न रुकती है गाड़ी,कभी नहीं होती है फेल।।
जीवन में हर आनंद मिले,कोई ऐसा रोग न आये।
जिस चक्कर में पड़,जीना ही मुश्किल हो जाये।।
अपने मन पर सब होता,सही जीवन ये शैली हो।
घर में लोग परेशान रहे न,यदि दवा न फैली हो।।
कोसों दूर रहो नशे से,नशे की हो न कोई आदत।
जीवन जीना एक कला है,बनाओ सुंदर आदत।।
कोई अवसाद न होगा तो,हर पल मिलें खुशियाँ।
सुखमय रहेगा जीवन,घर-आँगन आए खुशियाँ।।
मेरी ये सलाह सभी को,मानें न मानें तेरी है मर्जी।
फिरभी सबके खुशी खातिर,सबसे है मेरी अर्जी।।
ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
(शिक्षक,कवि,लेखक,समीक्षक,लघुकथाकार एवं समाजसेवी)
समाजसेवी-प्रांतीय,राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय व एशिया सेवा संगठन



