
मिले आकाश सा विस्तार जब पावन मोहब्बत को,
नजर में अक्श मिलता है सलोनी सी हकीकत को।
जहां दो दिल धड़कते हो वहां गम टिक नहीं पाता,
दुआएं चूम लेती हैं सदा ऐसी इबादत को।
भले ही वक्त की गर्दिश डराए राह में अक्सर,
मगर “आकाश” के हौसले कभी झुकने नहीं देते।
मोहब्बत के उजाले साथ हो तो जीत पक्की है,
कदम तूफान के आगे कभी रुकने नहीं देते।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




