
सुबह की रोशनी कहती है सच अब तो सना होगा,
अँधेरों के सफ़र का आज ही पर्दा उठा होगा।
नया ये साल समझाए—न हो ठहरा हुआ लहजा,
जो बोया बीज मेहनत का वही फल दे गया होगा।
नफ़रतों की धुंध छँटे, दिलों में धूप उतरे,
हर इक आँगन में रिश्तों का दिया जलता होगा।
क़लम बोलेगी इंसाफ़, ज़ुबाँ सच्ची रहेगी,
कठिन राहों में भी ईमान सिर ऊँचा हुआ होगा।
जो टूटी आस कल तक, आज फिर करवट लेगी,
उमीदों के परों में हौसलों का पंख लगा होगा।
सुमन बस ये दुआ है—साल मानवता सिखाए,
ख़ुदा के घर में हर दिल सर झुकाए खड़ा होगा।
डाॅ. सुमन मेहरोत्रा
मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार




