
गर्व रहेगा सदा सदा जिस भाषा में जन्म लिया।
मेरे भारत की भाषा गौरव जिसने हमें दिया।
मातृभूमि पर में वारी जहां हिंदी का उद्घोष हुआ।
मेरी भाषा हिंदी का शंखनाद हर और हुआ।
है सनातन का गौरव मेरी प्यारी हिंदी भाषा।
उच्चारण में सदा रहेगी अपनी हिंदी भाषा।
विश्व पटल पर हिंदी का गुणगान सदा रहा।
यू एन ओ संगठन में भी हिंदी का वर्चस्व रहा।
देश के कर्णधारों ने हिंदी में ही भाषण दिया।
गूंज उठा भरपूर सदन समर्थन घनघोर दिया।
करें उच्चारण गर्व से हम भी प्यारी अपनी भाषा।
तेरी शान में झुकने देंगे ए मेरी हिंदी भाषा।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




