साहित्य

जन-गण-मन के राही

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

जन-गण-मन के राही हम, भारत मांँ के रखवाले।
धर्म-कर्म हमको है प्यारा, देश भक्ति उर में पाले।।

सत्य समर्पण साहस संयम, कण-कण में है डोल रहा।
वंदे मातरम शब्द अमोलक, कानों मिश्री घोल रहा।।

बनी रहे यह प्रथा हमारी, ऐसी अलख जगाना है।
दिव्य शक्ति सबके उर भरके, घर-घर ध्वज फहराना है।।

वीर भगत आजाद बोस की, हर बच्चा कहे कहानी।
अंग्रेजों से खूब लड़ी थी,रानी बनके मर्दानी।।

राम-कृष्ण की पावन धरती, सत्य सनातन रीति हमारी।
कल-कल बहती गंगा-जमुना, महिमा जिसकी है न्यारी।।

सकल विश्व में अमिट छाप है, हिंदुस्तान निराला है।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सबका ही रखवाला है।।

बलिदानों के रक्त सनी इस, मिट्टी को नमन हमारा।
आओ सब जन मिलकर बोले, इंकलाब का ही नारा।।

छब्बीस जनवरी को हम सब, गणतंत्र दिवस कहते हैं।
इस दिन संविधान को लागू शुचि भारत में करते हैं।।

भूल गए जो कुर्बानी हैं, उनको याद दिलाए हम।
भारत माँ के चरणों में नित, अपना शीश झुकाए हम।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!