साहित्य

लोहड़ी प्रेम उल्लास का पर्व

डाॅ. सुमन मेहरोत्रा

 

मन को बहुत लुभा रहे, त्योहारों के रंग।
रंग-बिरंगी गगन में, उड़ने लगी हैं पतंग।

लेकर आई लोहड़ी, फिर से नूतन वर्ष।
मंगलमय हों दिन हमारे, सबके मन में हर्ष।

लोहड़ी के गीतों ने, शोभा और बढ़ाई।
रंग-बिरंगे परिधानों में, सजे दे रहे बधाई।

मौसम ने ली करवट, सूरज ने बदली चाल।
कलरव करते पंछी, हवा बजाती सुरमय ताल।

सर्दी को दूर भगाने, लकड़ी खूब जलेगी।
ढोल बजे, गिद्दे-भांगड़े से रौनक छलेगी।

फुल्ले, रेवाड़ी, मूंगफली, अग्नि को अर्पित।
हर्ष-उल्लास के भावों से, पर्व हुआ समर्पित।

बेटे का जन्म या शादी, खुशियाँ मनाई जाएँ।
नववधू पर स्नेह लुटे, सब मिल गीत गाएँ।

मक्के की रोटी संग, सरसों का साग।
नाचें-खाएँ सारे मिल, उमंगों का जाग।

खुश हो-होकर हँसते, लोहड़ी मनाते लोग।
अग्नि में मिष्ठान्न अर्पित, करते मंगल भोग।

आहट पाकर बसंत की, कोहरा हुआ अपंग।
फूली सरसों देख मन में, उमड़ी नई उमंग।

सुंदरी-मुदरी के गीतों पर, नाचे सारी रात।
बल्ले-बल्ले, लख-लख बधाइयों की बात।

डाॅ. सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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