
नव मानवतावाद से,अच्छे करना काम।
मात पिता की सेवा से,मिलता है आराम।।
नन्हा बालक तू रहा,तेरा रखते ध्यान।
गीले में खुद सो गए, तुझमें बसती जन।।
माता ने जीवन दिया,गुरु से मिलता ज्ञान।
इस जग में दूजा नहीं,दिखता पिता समान।।
पाला पोसा है तुम्हें,सहकर दुख दिन रात।
धरती पर भगवान हैं,चरण पखारो तात।।
प्रथम पूज्य माता पिता,दूजा प्रभु स्थान।
जीवन दाता तो समझ,होते सम भगवान।।
ठेस नहीं पहुँचे कभी,इतना रखना ध्यान।
इनकी सेवा से मिले,जीवन में वरदान।।
निर्जल व्रत जितिया करे,माता सारी आज।
चिरंजीव औलाद हो,मंगल हो सब काज।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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