साहित्य

मेरा सुभाष ज़िंदा है

कुलदीप सिंह रुहेला

एक वीरता भरी कविता

मेरा सुभाष ज़िंदा है, हर धड़कन की आवाज़ में,
हर सोई हुई चेतना में, हर उठते हुए साज में।
कटक की उस मिट्टी से निकला, आज़ादी का तूफ़ान बना,
बचपन से ही आंखों में जिसके, भारत का अरमान पला।

आईसीएस की कुर्सी छोड़ी, अंग्रेज़ी सत्ता ठुकराई,
माँ भारती की बेड़ियाँ तोड़ने, अपनी पूरी जान लगाई।
कांग्रेस की सीमाएँ तोड़ी, आगे बढ़कर राह बनाई,
आजाद हिंद की सेना खड़ी कर, नई मशाल जलाई।

जापान की धरती से गूंजा, स्वाधीनता का उद्घोष,
दिल्ली चलो का नारा देकर, भर दिया जन-जन में जोश।
अंडमान-निकोबार में लहराया, भारत माँ का मान,
शहीदों के बलिदान से सींचा, आज़ादी का स्वप्न महान।

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”
यह नारा नहीं, क्रांति की सबसे पवित्र गाथा है।
यह हर युवा की नसों में बहता,
नेताजी का जीवित विश्वास है।

न वर्दी से डरने वाला, न आंधियों से हारने वाला,
सुभाष वो नाम है जो, मौत से भी लड़ने वाला।
आज जयंती पर कहता है भारत, गर्व से सीना तान,
मेरा सुभाष ज़िंदा है, जब तक ज़िंदा है हिंदुस्तान।

जय हिन्द जय भारत

#कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!