Home/आलेख/मरहटा मुक्तक यमुना तट उपवन, विचरें व्रज-धन, संग रोहिणी लाल। श्री वत्स अँके हिय, खिलें जीव जिय, भक्ति भाव हर भाल।। पीताम्बर अनुपम,पूर्ण कला सम, अनिल तंतु गतिमान- सिर पाछिल अलकें, कुंचित झमकें,मुग्ध साँझ सरि ताल।। मीरा भारती। आलेख मरहटा मुक्तक यमुना तट उपवन, विचरें व्रज-धन, संग रोहिणी लाल। श्री वत्स अँके हिय, खिलें जीव जिय, भक्ति भाव हर भाल।। पीताम्बर अनुपम,पूर्ण कला सम, अनिल तंतु गतिमान- सिर पाछिल अलकें, कुंचित झमकें,मुग्ध साँझ सरि ताल।। मीरा भारती। Mukesh.tiwari205January 22, 20260 3 Less than a minute Facebook Twitter LinkedIn Tumblr Pinterest Reddit WhatsApp Mukesh.tiwari205January 22, 20260 3 Less than a minute Facebook Twitter LinkedIn Tumblr Pinterest Reddit WhatsApp Share Facebook Twitter LinkedIn Tumblr Pinterest Reddit VKontakte Share via Email Print