साहित्य

नववर्ष मनाया जाय

चनरेज राम *अम्बुज*

दिलों की दूरियाँ घटाया जाय।
दर्द- ओ- ग़म भुलाया जाय।
किसी के आँसुओं को पोंछ कर,
चलो नववर्ष मनाया जाय।

घरों में जिनके नहीं रोटी दाल है।
उनका भला कैसा नया साल है।
उन्हें भी खाने पर बुलाया जाय,
चलो नववर्ष मनाया जाय।

जो ठिठुर रहे हैं सर्दी में।
आओ उनकी हमदर्दी में।
इक अलाव जलाया जाय,
चलो नववर्ष मनाया जाय।

फुटपाथ पे गुज़री रातें जिनकी।
भूख से सिकुड़ी आँतें उनकी।
उन्हें भी आसियाँ दिलाया जाय।
चलो नववर्ष मनाया जाय।

पेड़ रिश्ते का उखड़ रहा है।
भाई-भाई से लड़ रहा है।
उनको इक साथ बिठाया जाय।
चलो नववर्ष मनाया जाय।

चनरेज राम *अम्बुज*
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश
मोबाइल नंबर 9935738757

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