साहित्य

नया वर्ष, नई उम्मीद

ज्योती वर्णवाल

 

नया वर्ष आया है, नई उम्मीद लाया है,
पहाड़ों की चोटियों पर, बर्फ़ का नूर छाया है।
सैलानियों के दिल में, फिर वही अरमान जागा है,
स्नोफॉल देखने का, एक नया उमंग जागा है।
नया वर्ष आया है, नई उम्मीद लाया है,
चाँदी जैसी बर्फ की परत, वादियों ने ओढ़ी है,
गुलमर्ग और सोनमर्ग ने, खूबसूरती की हद तोड़ी है।
गुलज़ार हुई हैं राहें, हर तरफ मुस्कान छाई है,
सफेद मखमल की चादर, कुदरत ने बिछाई है।
नया वर्ष आया है, नई उम्मीद लाया है,
केदार और बद्री धाम भी, बर्फ से नहाए हैं,
श्रद्धा और आनंद के, पावन पल ये आए हैं।
पर्यटकों की मस्ती और, वादियों का ये संगम,
दूर कर देगा सबके, बीते साल के सारे गम।

ज्योती वर्णवाल

नवादा (बिहार)

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