
हिन्दी भाषा का हम मान बढा़ऍंगे।
राष्ट्रभाषा का हम सम्मान दिलाऍंगे।1।
देवनागरी लिपि है इसकी मातृभाषा हमारी।
विश्व में हम इसको हरदम ऊॅंचा उठाऍंगे।2।
संस्कृत माँ ने गोद खिलाया हर भाषा पर भारी।
भारत के माथे की विन्दी इसे लगाऍंगे।3।
कानों में मिश्री सी घोले सरस सरल यह भाषा।
जग में इसका परचम हम लहरा इसे सिखाऍंगे।4।
सभ्यता की है धरोहर आस जगाती हिन्दी।
हिन्दी की ममतामयी ऑंचल में बस जाऍंगे।5।
राष्ट्र भाषा बनेगी यह आस जगाती हिन्दी।
सदा सोपान चढ़ेगी यह इसे चढाऍंगे।6।
मन से मन का तार जोड़ती ताल मिलाती हिन्दी।
‘किरण’ हम रोशन कर अलख जगाऍंगे।7।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




