साहित्य

सच्चा एहसास

जयचन्द प्रजापति 'जय'

मैं यही चाहता हूँ
एक ऐसा जहाँ बने

एक नयापन हो
सबका सच्चा ह्रदय हो
मानवता हर जगह हो

एक एहसास सदा रहे
करुणा का सागर बहे

कोई झूठ का घर न हो
प्रेम की धारा बहता रहे
सबका आदर्श जीवन हो

कोई अपराध न हो
कोई दुर्भावना न हो

सादगी सदा विराजती रहे
शान्तिमय जीवन हो
……
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
जैतपुर, हंडिया, प्रयागराज

कविता का भावार्थ….

यह कविता “सच्चा एहसास” में कवि जयचंद प्रजापति ‘जय’ एक आदर्श दुनिया की कल्पना करते हैं, जहाँ सच्चाई, मानवता और प्रेम का वास हो। वे चाहते हैं एक नया संसार बने, जिसमें हर हृदय सच्चा हो, करुणा का सागर लहराता रहे, झूठ का कोई स्थान न हो और प्रेम की धारा सदा बहती रहे। अपराध और दुर्भावना का नामोनिशान न हो, सादगी राज करे तथा शांतिमय जीवन हर जगह व्याप्त हो—यह भाव उनके शुद्ध हृदय की पुकार है।

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