साहित्य

सही व त्वरित निर्णय का महत्व

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

 

नौकरी के एक साक्षात्कार में यह
प्रश्न पूछा गया कि यदि आप के
सामने अचानक एक बड़ा सा काला
नाग आ जाय तो आप क्या करेंगे ?

एक व्यक्ति ने उत्तर दिया कि वह उस
काले नाग की सुंदरता का आनंद लेगा,
दूसरे ने कहा कि वह वहीं उसके
सामने डटकर खड़ा हो जाएगा।

एक अन्य व्यक्ति ने उत्तर दिया कि
मैं वहाँ से भागकर जान बचाऊँगा,
एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि काला
नाग मुझे देख कर खुद भाग जाएगा।

पर एक व्यक्ति ने उत्तर दिया कि वह
नाग भी मुझे देखकर भाग जाएगा,
और मैं भी उसे देखकर भाग जाऊँगा,
सारे उत्तरों में किसका उत्तर सही होगा।

शायद काले नाग को भी जब तक
कोई छेड़खानी न करे, कुछ नहीं करेगा,
और काले नाग को देखने वाले तथा
उस नाग को भी एक दूसरे से डर होगा।

इन सब में शायद अंतिम उत्तर ही
सही होगा, लेकिन जो भी निर्णय
नाग व उसे देखने वाले का होगा,
उसमें एक मिनट का समय लगेगा।

जब अपनी जान पर बात आ जाये
तो निर्णय लेने में बस एक मिनट से
ज्यादा देरी कोई भी नहीं लगाएगा,
वह शीघ्र निर्णय कर जान बचाएगा।

जान है तो जहान है, काले नाग जैसा
मामला अक्सर जीवन में आता होगा,
आदित्य शीघ्र सही निर्णय लेकर
कोई भी जीवन सुरक्षा रख पायेगा।

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

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