
नरेंद्र से विवेक बने, भारत का उजियार,
ज्ञान–दीप से जगमगाया, मानवता का संसार।
रामकृष्ण के चरणों से, पाया सत्य महान,
सेवा, साहस, प्रेम बने, जीवन के प्रमाण।
शिकागो की धर्मसभा, गूँजी भारत-जय,
“बहनो-भाइयो” से जग ने, पहचाना सत्य-नय।
नर में नारायण देखो, यही तुम्हारा धर्म,
दुर्बल में बल भरो सदा, जागे सुप्त कर्म।
उठो, जागो, लक्ष्य पकड़ो, कहते थे दिन-रात,
श्रद्धा, शक्ति, संकल्प से, बदलो अपनी बात।
युवा हृदय में फूँक दिया, आत्मबल का गान,
राष्ट्र-निर्माण हेतु दिया, कर्मपथ का ज्ञान।
आज जयंती पर हम सब, लें दृढ़ यह प्रण,
सेवा, साधना, राष्ट्र-हित, बने जीवन धन।
स्वामी विवेकानंद अमर, प्रेरणा अपार,
भारत के पथ-प्रदर्शक, युग-युग के आधार।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




