
मैं जब से हूॅं तुझसे मिला
फिर ना किसी से मैं तो मिला
तेरे हवाले जीवन ये सारा
है ही नही कोई तुझसे भी प्यारा, तुझसे भी प्यारा
मैं जब से हूॅं तुझसे मिला
फिर ना किसी से मैं तो मिला
है जीवन की धारा तू ही है किनारा
तेरे बिन कश्ती का ना है सहारा
मांझी तू ही तू खिवैया हमारा,खिवैया हमारा
मैं जब से हूॅं तुझसे मिला
फिर ना किसी से मैं तो मिला
ठहरा हुआ धड़कनों का नज़ारा
ऑंखों में रहती थी अश्कों की धारा
मिलकर के तुने जीवन संवारा, जीवन संवारा
मैं जब से हूॅं तुझसे मिला
फिर ना किसी से मैं तो मिला
कवि,लेखक, गीतकार,साहित्यकार:-
धीरज कुमार शुक्ला’दर्श’
ग्राम-पिपलाज,तहसील-खानपुर,
जिला-झालावाड़ ,राजस्थान (३२६०३८)




