
आज दिल ने फिर ज़िद की है,
कि तुमसे अपने हर एहसास कह दूँ।
इन धड़कनों में जो नाम बसता है,
उसे हर साँस के साथ लिख दूँ।
बीते लम्हे यादों में सिमट गए,
पर तुम हर पल मेरे आज में हो।
नया साल, नई राहें सही,
पर मेरी हर शुरुआत तुम हो।
ज़िंदगी ने खेल भी खूब खेला
कभी हँसाया, कभी रुला गई।
पर जब तुम्हारा हाथ थामा,
हर ठोकर भी मुस्कान बन गई।
ख्वाहिशें जो थक कर सो गई थीं,
तुम्हारी एक नज़र से जाग उठीं।
टूटे सपनों को जोड़कर फिर,
मेरी दुनिया तुमने सजा दी।
हर दिन, हर पल, हर ख्याल में,
बस तुम्हारा ही नाम लिखा है।
तुमसे कितनी मोहब्बत है मुझे,
ये दिल ने हर बार माना है।
मेरे लिए तुम सिर्फ़ चाहत नहीं,
तुम ही मेरा सुकून, मेरी पहचान हो।
मेरी हर दुआ, हर सपना,
हर अधूरी बात की तुम ही जान हो।
ये अल्फ़ाज़ नहीं, मेरी रूह है,
जो आज तुम तक चली आई है।
अगर मोहब्बत का कोई नाम हो,
तो वो बस तुम कहलाते हो
तृषा सिंह
देवघर झारखंड




