साहित्य

वह लड़की, मुझे,,,,,,

डॉ रामशंकर चंचल

वह लड़की
मुझे अच्छी लगती
वह अक्सर मुझे देख
दूर से ही
बेहद प्रसन्न हो जाती
क्यों नहीं जानता
पास आते ही
बहुत ही आदर से
नमस्कार करती
बेहद खुश हो
मेरा खड़ूस चेहरा
कितने ही टेंशन में हो
मैं भी उसे
उतने ही खुश हो
जवाब देता
ताकि उसी भी लगे
मुझे भी अच्छा लगा
वह लड़की
कुछ पल के लिए ही
जब भी मिलती
मेरा टेंशन , मानसिक तनाव को
गायब कर देती
वह लड़की
पता नहीं क्यों
खुश हो जाती मुझे देख
नहीं जानता
कभी कभी जल्दी जल्दी
चलती हुई
मेरे साथ चलने लगती
कैसे हैं सर
उसकी खुशी के लिए
बोल देता
अच्छा हूं
वह तुरंत स्वीकार करती
बोल जाती
हां पहले से
अब ठीक लगते हैं
मैं चुप रहता
ठीक सर
अच्छा लगा आप से
बात कर
और जिस गली में
उसका घर है
चल देती
उसकी खुशी के लिए
मुझे फिर बोलना पड़ता
हां मुझे भी अच्छा लगा
वह बहुत खुश हो जाती
पता नहीं क्यों
नहीं जानता वह लड़की
कौन है,की नाम हैं
बस वह जब भी मिलती
उसकी खुशी में साथ देते हुए
मैं भी सब कुछ
भूल मुस्कुरा देता

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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