
विश्व हिन्दी दिवस – १० जनवरी
हिन्दी आज करोड़ों की भाषा, है मातृ-वाणी महान,
६० करोड़ से अधिक बोलें , बढ़ता हुआ प्रतिदान।
दुनिया की शीर्ष चार भाषाओं में दर्ज यह प्रतिष्ठान,
भाषाई-समुद्र की लहरों पर, अब भारत का अभियान॥
अंकीय-युग में हिन्दी की, गति है तीव्र और तेज विकास,
इंटरनेट सामग्री में बढ़ रहा, है प्रतिवर्ष २५% प्रकाश।
ई-कॉमर्स के डेटा में यह, उभरती हुई है दूसरी शक्ति,
फ़िन-टेक, एड-टेक, हेल्थ-टेक में दिखती इसकी भक्ति॥
यूजर्स की सबसे तेज़ वृध्दि, वैश्विक हिन्दी की मांग में,
गूगल-सर्च और यूट्यूब दोनों, सब बोलें इसके रंग में।
मीट-अप्स, वेबिनार, पॉडकास्ट का विस्तृत इसका व्योम,
अनुवाद-सेवा में अब हिन्दी , एआई का नया ध्वज-धोम॥
दुबई से अफ्रीका तक, सूरीनाम, फ़िजी, रुस की भूमि,
हिन्दी का सांस्कृतिक नर्तन, राजनयिकों की है वाणी।
लंदन-पेरिस-बर्लिन-मलेशिया में हिन्दी मंच सजाए,
विश्व-वाणिज्य मंचों पर यह, समझ के दीप जलाए॥
अर्थ-नीति की रपट बताती — बाज़ार बहुभाषी चले,
वही कमाए विजय-ज्योति, जो स्वभाषा से जुड़े।
स्टार्टअप इकोसिस्टम बोले — “स्थानीय भाषा की जीत”,
हिन्दी में उत्पाद-नीति ने उछाले, वैश्विक निवेश के बीज॥
कूटनीति में हिन्दी स्वर जब, संयुक्त राष्ट्र-सम्मेलन गूंजे,
संवादों में मानव-मूल्य की भाषा पुनः विश्व में संपूजे।
भारत बोले तो जग सुनता — नीति, प्रगति शांति विचार,
GC, WTO, SCO में हिन्दी का, अब बढ़ रहा है विस्तार॥
यह भाषा केवल शब्द नहीं — आर्थिक शक्ति का स्रोत,
मीडिया अर्थव्यवस्था को देती, साधन और संजोत।
फ़िल्म, OTT, गेमिंग, एनीमेशन, डबिंग अनोखा व्योम,
हिन्दी ने वैश्विक मंचों पर रचा नवीन सांस्कृतिक रोम॥
आज समय यह उद्घोष करे — आत्मविश्वास का वंदन,
हिन्दी के बल पर विश्व-समाज में भारत का उच्चार।
बने नये संविदानों में है, सभी संवादों का नव-मान,
हिन्दी हो विश्व-भाषा , सत्य-शब्द का अभिषेक-विधान॥
“द्विज”भाषा वही प्रखर जो जग में योजक सेतु बनाये,
व्यापार से संस्कृति तक, मानवीय संबंधों को सजाये।
हिन्दी यह है दिव्य-संस्कृति , विज्ञान-युग का भी उद्घोष,
विश्व-सभाओं में जरुरी बने — “हिन्दी : संवाद का घोष!”॥
(अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग जनमानस में व्यावहारिक रूप से हिन्दी की महत्ता बताने के लिए किया)
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दिनेश चन्द्र गुरुगरिया ‘द्विज’
पीसांगन अजयमेरू राजस्थान




