साहित्य

बाधाएं-अड़चनें

ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

भाग्य में जो लिखे प्रभु हैं, वही आता सबके सामने।
कठिनाइयों के डर से भाई,कदापि लगें मत भागने।।
बड़ी परीक्षा है ये जीवन की,नजर के आमने-सामने।
धैर्यपूर्वक कदम बढ़ाएं तो,खुद बाधाएं लगें भागने।।

हरेक मानव के सामने यह,आती रहती कठिनाइयाँ।
वक्त एक-सा रहे सदा न,सुख-दुःख व कठिनाइयाँ।।
लड़ना इससे जिसे है आए,उनसे भागीं कठिनाइयाँ।
राह कठिन पर नहीं मुश्किल,दूर होंगीं कठिनाइयाँ।।

कभी-कभी कठिनाइयों का,दौर भी आए जीवन में।
कोई नहीं इंसान हैं ऐसे,जो इसे न झेला जीवन में।।
राजे महाराजे नवाबों ने भी,बाधाएं झेला जीवन में।
पीर पैगंबर सदपुरूषों को,आई अड़चनें जीवन में।।

सुख-दुःख के मिश्रण ये,जीवन आनंद-कठिनाइयाँ।
भगवान करे आए न सामने,जीवन में कठिनाइयाँ।।
कोरोना जैसी महामारी में,कितनी बड़ कठिनाइयाँ।
मिट गए परिवार-कुनबे,झेला समाज कठिनाइयाँ।।

परिस्थितियों-संघर्षों से ही,आत्मबल सदैव बढ़ा है।
चाहे जितनी ये कठिनाइयाँ,मानव हमेशा लड़ा है।।
तभी संकटों से मुक्त हुआ है,इंसान हर्षित खड़ा है।
मुश्किलों से लड़ जीत ही इंसाँ,सदैव बना बड़ा है।।

ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.

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