मैं रात ख्वाबों में खो गई
दिल पे दस्तक दे गया कोई,।
धड़कनों में प्यार के तार जोड़ गई
गालों पे प्यारा सा चुंबन दे गई।
यारों पता ठिकाना दिया ना कुछ,
दिन का चैन रात की नींद ले गई ।
इश्क जिंदा आशिक बीमार ये कैसा प्यार है
भटका गली चौराहे में नहीं उसका दीदार है।
दिलरूबा तेरी अलबेली अदाओं पे ये दिल निसार है,
यारो ये कैसा सितम ढा गई तन्हाई के चिराग जला गई ।
यूं शब्दों में क्या लिखूं यार तेरा प्यार,
लिखने वाले बैठे कहीं कवि गजलकार ।
ऐ दिवानी तेरी मुट्ठी में कैद मेरा प्यार है,
तूफानों ने कहर ढाया हुआ ना दीदार है ।
ये मासूम दिल बेकरार है,
जीत के भी मेरे प्यार के हार हैं ।
ये कैसी दस्तक ये कैसी दीवार है,
कितना इंतजार करूं दिल क्यों खतावार है
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शिवा सिंहल आबुरोड



