हास्य-व्यंग्य के जादूगर जयचन्द प्रजापति ‘जय’: दहेज से नेताजी के जुमलों तक, समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार

प्रयागराज, 27 फरवरी 2026: (दि ग्राम टूडे)
हिंदी साहित्य की दुनिया में हास्य-व्यंग्य का ऐसा जादू चलाने वाले जयचन्द प्रजापति ‘जय’ अपनी चुटीली कलम से आम जीवन की विसंगतियों को नंगा कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में दहेज लोभ, भ्रष्टाचार, चापलूसी और नेताओं के खोखले जुमलों पर तीखा कटाक्ष बोलचाल की भाषा में बुना गया है, जो पाठकों को हंसाते हुए सोचने पर मजबूर कर देता है।
सामाजिक मुद्दों पर ‘जय’ की पैनी नजर खासा प्रभाव डालती है। ‘दहेज के लिए सुर बदला’ में दहेज के लोभी रिश्तों का खुलासा, ‘खटमल और भ्रष्टाचार दोनों रक्तचूसक’ से भ्रष्टाचार की खिचड़ी, ‘चापलूसी’ की चमचागिरी और ‘आधुनिक प्रेमिका’ से रिश्तों की आधुनिक फिजूलखर्ची—ये सभी स्थानीय स्लैंग और यथार्थ चित्रण से सजे हैं। पाठक खुद को इनमें झलकते देख हंसते-हंसते गुस्से से लाल हो जाते हैं।
राजनीतिक पटल पर भी ‘जय’ कमाल दिखाते हैं। ‘नेताजी के जुमले’, ‘मंत्री बनने का ख्वाब’, ‘लोकतंत्र में न्याय की उम्मीद’ और ‘राम भरोसे’ जैसी रचनाओं में चुनावी वादे, भ्रष्टाचार और जनता की बेबसी को हास्यपूर्ण ढंग से चित्रित किया गया है। नेताओं की ‘कॉरप्शन-फ्री’ छवि और सरकार के भरोसे पर उनका कटाक्ष समाज सुधार की मांग को तेज करता है।
सरल भाषा और हास्य के जाल में बंधे इन व्यंग्यों से मुद्दे गहराई तक उतरते हैं। साहित्य प्रेमी ‘जय’ को हास्य-व्यंग्य का जादूगर मानते हैं, जिनकी कलम सामाजिक-राजनीतिक गिरावट पर सुधार की चिंगारी जलाती है। उनकी रचनाएँ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जो हिंदी व्यंग्य परंपरा को नई ऊँचाई दे रही हैं।




