
बहुत कुछ खोकर भी
कुछ पा ना सके ,
चाहतों के देखें जो सपने
कभी पूरा कर ना सके।
मगर उम्मीद का दिया
जला रखा है अब तलक,
दीया वो उम्मीद का
कभी बुझा ना सके ।
है निराशा अभी थोड़ी
मगर कोई बात नहीं,
रात के बाद दिन
को निकलना होगा ।
जीवन नाम है संघर्ष का
धैर्य से काम करना है,
कुछ खोकर पाना,पाकर खोना
जग की रीत है
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍️
सहारनपुर उत्तर प्रदेश



