साहित्य

कुछ खोना कुछ पाना

प्रिया काम्बोज प्रिया

बहुत कुछ खोकर भी
कुछ पा ना सके ,
चाहतों के देखें जो सपने
कभी पूरा कर ना सके।

मगर उम्मीद का दिया
जला रखा है अब तलक,
दीया वो उम्मीद का
कभी बुझा ना सके ।

है निराशा अभी थोड़ी
मगर कोई बात नहीं,
रात के बाद दिन
को निकलना होगा ।

जीवन नाम है संघर्ष का
धैर्य से काम करना है,
कुछ खोकर पाना,पाकर खोना
जग की रीत है

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍️
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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