साहित्य

मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है

एस के कपूर"श्री हंस"

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मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है।
रिश्तों में मुस्कान का कोई और नहीं तोल होता है।
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मौनऔर मुस्कान के यूं तो कई और भीअर्थ होते हैं।
जान लो मुस्कान बिन सारे भाव ही व्यर्थ होते हैं।।
मुस्कान से परहेज तो जान लो सब बेमोल होता है।
मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है।।
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चेहरे की मुस्कान दूजे के दिल में उतर जाती है।
सबके दिलों का मैल यह साफ कर ले आती है।।
जादू सा सीधा असर इसका बहुत अनमोल होता है।
मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है।।
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आपके हाँ और ना दोनों की गरिमा बढ़ा देता है।
मुस्कान की आदत ऊंचे आसन पर बिठा देता है।।
सच्ची मुस्कराहट दिल की छवि का बोल होता है।
मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है।।
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।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।

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