साहित्य

प्रेरणा

निवेदिता सिन्हा

जीवन यूं तो चलता रहता है ।
समय किसी के लिए कभी न रूकता है ।
पर हमारे जीवन में कुछ लोग खास होते हैं ।
हमारी प्रेरणा बन हमें अपने व्यक्तित्व से मिलाते है ।
हमारा व्यक्तित्व उनसे प्रभावित होता है ।
अपनी मंजिल पाने में उनका खास मार्गदर्शन होता है।
मेरे जीवन की प्रेरणा बने हमेशा मेरे पापा महान ।
अपने व्यक्तित्व से वो हमेशा होते परिवार की शान ।
सभी गुणों से परिपूर्ण , तब भी न था घमण्ड ।
हमेशा जमीन से जुड़े , पेशे से चिकित्सक ।
हमारे संग जाने कितनों के बने मार्गदर्शक ।
लिखने पढने, चित्रकला का हुनर भी उन्ही से पाया । कुदरत से करते थे बेहद प्यार ।
कम में भी खुशियाँ लुटाते थे बेशुमार ।
निःस्वार्थ हमेशा करते थे किसी की मदद ।
ईमानदारी के थे सच्चे मिसाल ।
बेईमानी से कभी न कमाया कोई धन माल ।
आज भी वो है मेरे जीवन की प्रेरणा ।
बहुत कुछ हुनर संग सीखा हमेशा खुल कर जीना ।
भले आज नहीं हैं वो हमारे आस पास ।
पर जीवन की प्रेरणा बन हर मुश्किल में महसूस होते आस पास ।

निवेदिता सिन्हा
गया जी, बिहार

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