
जयती जय मां शारदे , ऐसा दो वरदान ।
हाथ जोड़ बिनती करु ,पाए हम सद ज्ञान ।
ज्ञान दायनी शारदे ,प्रकट करु आभार ।
मुझ पर ऐसी कर कृपा ,बढ़े लेखनी धार ।
हे माता श्वेताम्बिके, धरो शीश पर हाथ ।
नित नवीन रचना लिखू ,चरण नवाऊं माथ ।।
मां वागेश्वरी वर दो , रचूं नवल साहित्य ।
उन्नति के पथ पर चलूं ,चमकूं ज्यों आदित्य ।।
डॉ स्वाति पांडेय प्रीत
लखीमपुर खीरी
उत्तर प्रदेश




