
ये धोखेबाज़ इंसान, चेहरों पर हँसी सजाए,
दिल में छुपाए काँटे, मीठे बोल सुनाए।
मतलब की इस दुनिया में रिश्ते हुए बाज़ार,
सच्चाई तन्हा बैठी है, झूठ हुआ सरदार।
वक़्त पड़े तो अपने भी बदलें अपनी चाल,
पीठ पीछे वार करें, और सामने रखें ढाल।
वादों के मेले लगते, सपनों की होती नीलामी,
सच्चे दिल की कीमत बस रह जाती है नाकामी।
हर चेहरा नक़ाब ओढ़े, पहचान कहाँ से लाएँ,
विश्वास की टूटी डोरी फिर से कैसे हम जुड़ पाए
फिर भी दिल ये कहता है सच का दीप जलाओ,
अँधियारे के सीने में उजियारा बन कर आओ।
धोखे की इस दुनिया में खुद को सच्चा रखना,
चाहे जितने ज़ख्म मिलें, पर इंसानियत मत खोना।
ये धोखेबाज़ इंसान बदलेंगे एक दिन ज़रूर,
जब सच की आवाज़ उठेगी भरकर पूरा सुर।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




