
गोरखपुर। नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और साधना का पर्व नहीं, बल्कि यह शरीर और मन के शुद्धिकरण का भी श्रेष्ठ अवसर है। इस दौरान किया जाने वाला फलाहार (व्रत का आहार) यदि सही तरीके से लिया जाए, तो यह एक प्रकार का शरीर शुद्धिकरण कार्यक्रम बन सकता है।लेकिन प्रश्न यह है कि क्या नवरात्रि का फलाहार वास्तव में स्वास्थ्यवर्धक है? इस संबंध में विस्तृत चर्चा की प्रसिद्ध होमियोपैथिक चिकित्सक डाक्टर रुप कुमार बनर्जी ने। उन्होंने बताया कि नवरात्रि में सामान्य अनाज (गेहूं, चावल) त्यागकर फल, दूध, सूखे मेवे, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा आदि का सेवन किया जाता है। यह आहार हल्का, सात्विक और पाचन में अपेक्षाकृत सरल होता है। फल, सब्जियाँ और हल्का भोजन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।इससे लिवर और पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है। यदि सही मात्रा और संतुलन रखा जाए, तो फलाहार कैलोरी कम करता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है।लेकिन ध्यान रहे कि अधिक तला हुआ “व्रत का खाना” वजन बढ़ा भी सकता है। फल (जैसे केला, सेब, पपीता) प्राकृतिक शर्करा से भरपूर होते हैं, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं।सूखे मेवे (बादाम, अखरोट) लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं।सात्विक भोजन मन को शांत करता है, जिससे ध्यान और साधना में वृद्धि होती है।
डाक्टर रुप कुमार बनर्जी ने बताया कि फलाहार नुकसानदायक भी हो सकता है? यदि तला-भुना “व्रत स्पेशल” भोजन जैसे साबूदाना की तली खिचड़ी, कुट्टू की पूड़ी, आलू चिप्स, मूंगफली फ्राई, सूखे मेवे को फ्राई आदि ये सब मिलकर व्रत को स्वास्थ्यप्रद से अस्वास्थ्यप्रद बना देते हैं। बहुत अधिक मिठाई, शक्कर वाली चाय, या ज्यादा फल (विशेषकर केला, आम) लेने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है। कुछ लोग पूरे दिन कुछ नहीं खाते और शाम को बहुत भारी भोजन करते हैं।इससे एसिडिटी, गैस और कमजोरी हो सकती है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी चाहिए जिन्हें मधुमेह , उच्च रक्तचाप है। इसके साथ गर्भवती महिलाएं ,बुजुर्ग भी। इन्हें बिना अपने चिकित्सक की सलाह के कठोर व्रत नहीं रखना चाहिए।
फलाहार को स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए ताजे फल और सलाद को प्राथमिकता दें , तली चीज़ों की जगह उबला या भुना भोजन लें, पर्याप्त पानी और नारियल पानी पिएं,कम मात्रा में लेकिन बार-बार खाएं,शक्कर की जगह शहद या प्राकृतिक मिठास लें। नवरात्रि का फलाहार स्वास्थ्य के लिए वरदान भी बन सकता है और नुकसान का कारण भी ,यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या और कैसे खा रहे हैं।यदि संयम, संतुलन और सादगी रखी जाए, तो यह व्रत शरीर का शुद्धिकरण, मन की शांति और स्वास्थ्य का संवर्धन, तीनों एक साथ देता है।



