साहित्य

दिल

_राम किशोर वर्मा

कवि-शायर मजनूं करें, दिल देने की बात ।
अतिशयोक्ति में बोलना, यह इनकी औकात ।।१।।
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दिल को जीता जा सके, जमती है कुछ बात ।
दिल देने की बात तो, हजम न होती भ्रात ।।२।।
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दिल के बहुत मरीज हैं, तरह-तरह के रोग ।
दिल आने के रोग में, तिल-तिल जले वियोग ।।३।।
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दिल से हो मजबूर तो, गलत करे कब काम ।
सुन दिल की आवाज को, होगा कब बदनाम ।।४।।
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ध्यान लगा सुन तो जरा, दिल उगले सच राज ।
क्षणभर में निर्णय करे, हाँ-ना में आवाज ।।५।।
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परवश होकर ही सदा, दिल को जाता हार ।
कैसा अवसर आ पड़ा, मीठा है या खार ।।६।।
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कोई दिल से ठान ले, बढ़े लक्ष्य की ओर ।
जीवन में उसके कभी, आती सुंदर भोर ।।७।।
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दिल को बहुत संँभाल कर, रखना है श्रीमान ।
सारा जग इसमें बसे, मानवता भगवान ।।८।।
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दिल जैसे ही टूटता, घृणित लगे संसार ।
घिर जाता अवसाद से, जीवन लगता भार ।।९।।
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भारत ही वह देश है, अच्छा है व्यवहार ।
बाग-बाग तब दिल हुआ, मिला सभी से प्यार ।।१०।।
*_राम किशोर वर्मा*
जयपुर (राजस्थान)
दिनांक:- १४-०३-२०२६ शनिवार

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