
कह देने से दिल की बात
आकाश नहीं टूटता,
पर भीतर जमी हुई
चुप्पियों का बोझ ज़रूर छूटता।
जो शब्द होंठों तक आकर
सालों से ठहर जाते हैं,
वे ही मन के कोनों में
अनकहे आँसू बन जाते हैं।
जब दिल की गिरहें खुलती हैं,
मन हल्का हो जाता है,
जैसे बरसों का बादल
बरसकर निर्मल हो जाता है।
जब कभी कोई समाधान मिलता है,
कभी नया रास्ता दिख जाता है,
और कभी बस इतना होता है—
कि दर्द किसी के संग बँट जाता है।
सच कह देने से रिश्तों में
विश्वास के दीप जलते हैं,
छुपे हुए संदेह के अँधेरे
धीरे-धीरे खुद ही ढलते हैं।
दिल की बात कहना
कमज़ोरी नहीं, साहस है,
यह आत्मा का वह आईना है
जिसमें सच्चाई का प्रकाश है।
जो अपने मन की आवाज़ सुन ले,
वही खुद को जान पाता है,
दिल की भाषा को समझकर ही
इंसान खुद तक पहुँच पाता है।
इसलिए कभी-कभी
खामोशी से बाहर आना ज़रूरी है,
दिल की बात कह देना भी
कभी-कभी जीवन में बहुत जरूरी है।
स्वरचित मौलिक रचना
सुमन बिष्ट, नोएडा




