साहित्य

दुर्गा मातारानी द्वितीय रूप- ब्रम्हाचारिणी

संगीता वर्मा

तुम्हीं हो मैया ब्रम्हाचारिणी
तुम्ही हो मैया कष्टों को हरने वाली।

समृध्दि और वैभव का प्रतीक है
एक हाथ में कलश दूसरे हाथ
में माला लिए श्र्वेत परिधान में
माँ दुर्गा का द्वितीय स्वरूप लिये ।

ब्रम्हाचारिणी धन्य- धान्य और
ऐश्र्वर्य करने प्रदान करती है
समाज और परिवार में शांति
स्थिरता बनी रहे ये पर्फ़ान करती है।

सबकी सुनती है मातारान
विनती प्रार्थना परेशानी।
अपने सब भक्तों पर करती है
मेहरबानी।

द्वितीय ब्रहाचारिणी मातारानी
के नाम का जय जयकारा लगाने वाले जय माता दी -जय माता दी-कहने लिखने बोलने वाले।

माँ का पूजा अर्चना करने वालो को माता सुख,समृद्धि,खुशहाली
और सौभाग्य का आशीर्वाद
सदैव बनाये रखती है।

प्रेम से बोलो जय माता दी,
जय माता दी सारे मिलकर
बोलो जय माता दी
ब्रम्हचारिणी माता की जय हो ।।

स्वचरित एवं मौलिक
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!