जंकफूड, स्ट्रीटफूड और पैकेज्ड फूड के सेवन से से बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा
डॉ रुप कुमार बनर्जी

आधुनिकता और शहरी जीवनशैली की तेज़ रफ्तार के साथ हमारे खान-पान की आदतों में भी बड़ा बदलाव आया है। आजकल जंक फूड, स्ट्रीट फूड और पैकेज्ड स्नैक्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। चाट, गोलगप्पा, समोसा, बर्गर, पिज़्ज़ा, चाउमीन, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, बिस्कुट और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे खाद्य पदार्थ स्वाद, सुविधा और आसानी से उपलब्ध होने के कारण लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुके हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इन खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन शरीर के लिए कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है, विशेष रूप से किडनी के लिए।
विश्व किडनी दिवस, जो प्रत्येक वर्ष मार्च महीने के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है,का उद्देश्य लोगों में किडनी के स्वास्थ्य, किडनी रोगों की समय पर पहचान और उनकी रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
किडनी : स्वास्थ्य की मौन संरक्षक :- किडनी हमारे शरीर के अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं, जो शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। सेम के आकार के ये अंग लगातार रक्त को फ़िल्टर करके शरीर से विषैले पदार्थों और अपशिष्ट तत्वों को बाहर निकालते हैं।रक्त को शुद्ध करने के साथ-साथ किडनी शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, इलेक्ट्रोलाइट स्तर को नियंत्रित करने तथा रक्तचाप को संतुलित रखने में भी मदद करती है। किडनी की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पूरे शरीर के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
जंक, स्ट्रीट और पैकेज्ड फूड कैसे पहुंचाते हैं किडनी को नुकसान? :- अधिकांश प्रोसेस्ड और स्ट्रीट फूड में अत्यधिक मात्रा में नमक, रिफाइंड तेल, कृत्रिम रंग, प्रिज़र्वेटिव और अस्वस्थ वसा (अनहेल्दी फैट) पाए जाते हैं। लंबे समय तक इनका सेवन किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।नमकीन स्नैक्स में मौजूद अत्यधिक सोडियम रक्तचाप को बढ़ा देता है, जिससे किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी प्रकार अत्यधिक कैलोरी वाले जंक फूड मोटापा और मधुमेह को बढ़ावा देते हैं, जो क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
पर्याप्त पानी न पीना और अत्यधिक नमक का सेवन किडनी स्टोन (पथरी) की संभावना भी बढ़ा सकता है। इसके अलावा पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रिज़र्वेटिव और रासायनिक तत्व शरीर में विषैले पदार्थों का बोझ बढ़ा देते हैं, जिससे किडनी को उन्हें बाहर निकालने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है,साथ ही,अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किए गए स्ट्रीट फूड से संक्रमण होने की संभावना रहती है, जो मूत्र मार्ग और किडनी को प्रभावित कर सकते हैं।
किडनी रोग के प्रारंभिक चेतावनी संकेत:- किडनी के रोग अक्सर धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होते हैं, लेकिन शरीर कुछ प्रारंभिक संकेत देता है। जैसे-चेहरे या पैरों में सूजन , पेशाब करते समय जलन, झागदार पेशाब , अत्यधिक थकान , भूख कम लगना , बार-बार या बहुत कम पेशाब आना, कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द। इन लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक जांच से किडनी रोग का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकता है।
होम्योपैथिक दृष्टिकोण :- होम्योपैथी में उपचार केवल रोग के आधार पर नहीं बल्कि पूरे व्यक्ति की प्रकृति, लक्षणों और मूल कारणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। उपयुक्त औषधि का चयन रोगी की शारीरिक और मानसिक संरचना के अनुसार किया जाता है।होम्योपैथिक चिकित्सा शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और शरीर की स्वाभाविक उपचार प्रक्रिया को सक्रिय करने में सहायक होती है। हालांकि किसी भी प्रकार की दवा का सेवन केवल योग्य चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
किडनी को स्वस्थ रखने के सरल उपाय :- किडनी के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कुछ सरल जीवनशैली उपाय अपनाए जा सकते हैं जैसे – दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं , जंक फूड, स्ट्रीट फूड और पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन सीमित करें , आहार में ताजे फल, सलाद और हरी सब्जियां शामिल करें, अधिक नमक, चीनी और तले-भुने भोजन से बचें, नियमित व्यायाम या योग करें, शर्करा युक्त और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का सेवन कम करें , समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए संदेश :- किडनी हमारे शरीर के ऐसे अंग हैं जो दिन-रात बिना रुके रक्त को शुद्ध करने का कार्य करते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए स्वस्थ खान-पान और संतुलित जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
विश्व किडनी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ आदतें अपनाकर किडनी रोगों के बढ़ते खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पौष्टिक भोजन को अपनाना और जंक व प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना दीर्घकालिक किडनी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ रुप कुमार बनर्जी
होमियोपैथिक चिकित्सक



