साहित्य

कविता दिवस पर—मैं कौन सी कविता लिखूँ?

सीता सर्वेश त्रिवेदी

कविता दिवस आया, मन फिर सोच में डूबा,
क्या लिखूँ आज—दर्द या कोई मीठा सा लम्हा?

क्या लिखूँ उस दिल की जो चुपचाप रोता है,
या उस प्रेम की जो हर हाल में संजोता है।

नफरत की आग भी है दुनिया के कोनों में,
या लिख दूँ मोहब्बत जो बसती है सपनों में।

शब्दों की तहज़ीब का श्रृंगार करूँ मैं,
या सच्चाई की तलवार से प्रहार करूँ मैं।

लिख दूँ माँ की ममता या बाप का सहारा,
या लिख दूँ जीवन का अधूरा सा किनारा।

कविता तो आईना है हर एहसास का,
यह रंग है खुशियों का, और दर्द की प्यास का।

आज कविता दिवस पर बस इतना समझ आया,
हर भाव में छुपा है एक गीत का साया।

ना सिर्फ प्रेम, ना केवल दर्द का संग,
कविता है जीवन—हर एहसास का रंग।

तो आज मैं हर जज़्बात को शब्दों में ढालूँ,
कविता दिवस पर एक पूरी दुनिया उकेर डालूँ।

सीता सर्वेश त्रिवेदी जलालाबाद शाहजहांपुर

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