
घर को स्वर्ग बनाती नारी,
घर की सच्ची पहचान है।
ममता, करुणा, त्याग की गंगा,
उससे ही हर अरमान है।
माँ बनकर वह स्नेह लुटाती,
बहन बनाकर प्यार देती।
पत्नी बन जीवन की राहों में,
हर दुख में आधार देती।
कभी धरा-सी धैर्य दिखाती,
कभी गगन-सी उड़ जाती है।
संघर्षों की कठोर धूप में,
सोने-सी तपकर आती है।
खेल, विज्ञान और रणभूमि में,
हर क्षेत्र में नाम कमाया।
मेहनत, साहस और लगन से,
नारी ने इतिहास बनाया।
देव भी करते जिसकी पूजा,
ऐसी पावन मूरत नारी।
सम्मान जहाँ मिलता उसको,
वहीं बसती खुशहाली सारी।
नारी की गरिमा से ही तो,
जीवन का हर रंग खिला है।
उसके होने से ही जग में,
सुख और प्रेम का दीप जला है।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)




